बिमारीयों का मूल कारण हमारी सोंच !
बिमारीयों का मूल कारण हमारी सोंच “जैसा हमारा स्वभाव होता है, वैसा ही हमारा स्वास्थ्य बनता है।” हरि बिमारी सिर्फ बॉडी मै नहीं भावनाओ मे भि होती है हर भवन का हमरे बॉडी के एक एक आंग से रिश्ता होता है ! और हमारी सोच उस अंग पर परिणाम छोड़ जाती है !
हमारे बॉडी मै जोभि चेंजेस हो रहे है ओ एक थॉट प्रोसेस से हो रहे है !
कौनसा इंसान है जो बीमार नहीं होता और कौनसा इंसान है जो ठीक नहीं होना चाहता ! हर कोही बिमारियोंसे गुजरता है लेकिन उसका कारण जानते है आप ! सबसे पहले कोही भि पीड़ा होती है उसकी शुरुवात दिमाग से होती है ! तो हम अपने विचार पर कैसे नियंत्रण करे ये आना चाईए ! पीड़ा शरीर की होती है कारण मानसिक होता है ! दुनिया मे जितनी भि बिमारिया होती है उसमे 90% बिमारिया हमारे थॉट प्रोसेस से होती है !
हमार शरीर प्रकृति ने एसा बनाया की मरते दम तक उसका एक एक कोषाणु अपनी पूरी मॅक्सिम कॅपेसिटी और क्षमता के साथ काम करना चाहता है , अगर अप उसके काम मै बाधा ना डाले तो ओ एक फल की तरह पक कर संसार से अलग होगा ! आखें मरते दम तक दिखाना चाहती है , इंटेसटाईं पेट साफ करना चाहता है , किडनी फ़िल्टर करना चाहती है लंग्स ऑक्सीगेशन करना चाहता है !
हमारी बॉडी मे ही हीलिंग पावर है लेकिन हम समाधान बाहर ढूंढ रहे है ! हर महीने नई टेस्ट करते है ,हर महीने नए एंजेकटीऑन लगवाते है हर महीने मे गोलीय खरीदते है ! जितनी भि पैथी इस दुनिया मै काम कर रही है ओ सिर्फ सेल्फ हीलिंग पावर की मदत से अगर हम सेल्फ हेयलिंग पावर को हटा दे तो सब पैथी ज़ीरो है ! अगर हमारे बॉडी मै प्रतिक्रिया करने की क्षमता ही नहीं तो हमरे दवाईया , हार्ब सुपर फूड क्या काम के !
एनर्जी तो हर व्यक्ति मे हर इंसान मे हर पेड़ पौधों मे होती है ! उसे हम प्राण ऊर्जा कहते है ! उस प्राण ऊर्जा को कमजोर कौन करता है हमारी सोंच हम हर वक्ति कुच निगेटिव डर चिंता धुस्सा तनाव मे रहते है तो हमारी एनर्जी लो लेवल पर रहेगी हमारे हार्मोन केमेस्ट्री जो करतीजोल बनाकर महरि बॉडी को डैमिज करते रहेंगे क्योंकि महने डेमेजिन फैक्टर को प्रोविगेन कर दिया मेंटली तो हम एनर्जी को काम कर रहे है !
ये छोटी छोटी चिजे हमारे बॉडी पर क्या परिणाम छोड़कर जाती है ! बिहेवीयर पटर्न आज की डेट मे बहूत असर डालता है ! तो हमार स्वास्त हमारे बिहेवीयर को निर्भर होता है !
अगर अपको कोही कहता है की मुजे कोही तकलीफ हुई बुखार आया और ये कैंसर होने के सखेत थे फ़िर पता चल की ये कैंसर था जब अपको बुखार आता है तो हम सोचते है काही मुजे भि कैंसर तो नहीं हुआ सबसे पहेले वही सोचएगे ये जैसेही अपने आपके दिमाग मे विचार डाला तो आपके बॉडी मे ये सेल्स बनाना शुरू हो जाएगा हमारे बॉडी के सेल्स हमारे थॉट प्रससेस से रेलेटेड है ! दुनिया मे जीतने भि बिमारिया होती है ओ हमारे ईमोशनल थिंकिंग और थॉट प्रोसेसस से होती है ! तो आपका एक छोटासा थॉट एक सेल्स को बदल देता है जो डेसीस सेल नहीं है उसको भि डेसीस सेल्स बना सकता है इतनी ताकत है हमारे सोंच मै
हर बिमारी से नहीं भावनाओ से भि होती है हर भवन का हमरे बॉडी के एक आंग से रिश्ता होता है !
गुस्सा ( anger weakens your liver) जिस किसी को लीवर की तकलीफ है उसका स्वभाव बहूत ग़ुस्सेवाला होगा , ग़ुस्सा लिवर को कंजोर करता है ! जब चीज़ें हमारी इच्छा के अनुसार नहीं होतीं या हमें चोट/अन्याय महसूस होता है, तो जो तेज़ प्रतिक्रिया आती है उसे गुस्सा कहते हैं। हम हमेशा देखते है की जो इंसान जादा ग़ुस्सा करता है ओ हर बात पर चिड़चिड़ करता है उसके बहूत सारे रिश्ते होते है उसमे दूरी रहेती है हमेश जल्दबाजी मै गलत फैसले लेता है और बाद मै पछतावा करता है ! अपेक्षा पूरी ना होना ,जादा तनाव, थकान या नींद की कमी इसकी वजह से हाय ब्लैड प्रेशर ,सिरदर्द ,दिल की बिमारी से गुजरना पड़ता है ! ग़ुस्से मे दूसरों की गलती की सजा खुद को देते है ! जो इंसान बहूत गुस्सा करता है हमेशा कविल फैटी लीवर होती है !
दुख (grief weakens your lungs)दुख एक प्रभावी भवना है ! हर इंसान को जिंदगी मे कभी ना कभी दुख से गुजरना पड़ता है ! जिदागी मे हमे किसी चीज का भारी नुकसान हो जाता है या कोही अपना हमसे दूर चल जाता है तो हमे बहूत दुख होता है ! हम अपने बहूत करीबी इंसान को खो देते है या हमारे बहूत करीबी हमे धोका देता है तो हमे बहूत जादा दुख होता है ! हम बहूत उदास रहते है ,अकेले रहेन पसंद करते है अपना आत्मविष्यवस काम हो जाता है और नकारात्मक सोंच आती है ! कोही बहूत अकेले राहत है तन्हाई जिदांगी जीत है उसे सर्दी जुकाम जैसी प्रॉब्लेम होती है क्योंकि grief lungs को कमजोर करता है ! जो बच्चा जादा रोता है हमेश कफ और कोल्ड का शिकार रहेट है !
चिंत्त (warry weakens your stomach) चिंत्त एक एसी मानसिक स्तिथि है जीसमे इंसान बार बार अनेवाले भविष्य के बारे मे या फ़िर कोही समस्य के बारे मे सोचता है ! जिनका स्वभाव बहूत चिंता वाला होता है ,ओ हमेश एक ही बात करते है कया होगा ,कैसे होगा ,अगर एसा हो गया तो कोही बहूत चिंता मे राहत है उसको स्टामक के प्रॉब्लेम होते है ! जब कोही इंसान
डर (fear weakens your kidney) जब हमे किस चीज से खतरा या नुकसान होने की संभावना पैदा होती है उस स्तिती को हम डर कहते है ! इंसानको हमेशा असफल होनेका , किसी बिमारी या मौत का डर, बुरे सपनों का डर ,किसी भारी नुकसान का डर , या अपनों का खोने का डर रहेट है इसकी वजह से घबरत पैनिक अटैक की संभावना होती है ! जब बच्चे को कोही बहूत डाटता है तो कुच बच्चे को पेशाब आता है क्योंकि उसकी किडनी ऐक्टिव हो जाती है !
तनाव (stress weaken your brain) अशी सटीटी जब हम किसी समस्या या जिनहेडरी को संभाल नहीं पाते तब तनाव महसूस होता है ! एसी सटीटी मै दिमाग और शरीर पर दबाव जादा होता है ! जीसमे इमुनिटि कमजोर हो जाती है एकड़यंसे थकान महसूस होता है , नींद नहीं लगती ,बेचनी महसूस होती है ! हम देखाते है जब कोही इंसान तनाव मे होता है तो ओ क्या करता है उसे खुद पता नहीं चलता क्योंकि उसका ब्रान कमजोर हो चुका होता है !
हमारी सोंच से हमारे शरीर मे केमिकल सिक्रेशन होता है उसका असर शीध हमारी हेल्थ पर पड़ता है इसीलिए हमे सबसे पहेले हमारी सोंच बदलनी होगी ! जिस दिन आपका मूड खराब होता है जिस दिन आप रो रहे हो जिस दिन अप तनाव मे हो उस दिन अपको खाना हजम नहीं होता क्योंकि उस समय आपके शरीर मे पाचक रस कम बंनता है ! हम जो खाना खाते हो तो ओ हजम ही नही होता तो शरीर मै कूड़ा बन जाता है !
मानलीजिए हमारे स्वास्थ को ठीक करने के लिए हर नामुनकीं कोशिश करते है लेकिन बीमार्य ठीक होने का नम ही नहीं लेती हम हर जाते है बिमारीयों के आगे लेकी समाधान हमारी बॉडी के अंदर होता है और हम बहार धुंडते है ! जैसे हमारा हाथ है और हमने उसे कस कर रस्सी से बांध लिया है उस वजाह से बहूत दर्द होता है और हम सब उपाय करते है दर्द को काम करने के लिए लेकिन दर्द कम नहीं होता कैसे होगा जब तक हम उसे छोड़ते नहीं उसी तरह ग़ुस्सा ,दुख ,चिंत्ता, डर और तनाव हमारे शरीर को बांध देता है हम उसे खोलेंगे तो बिमारिंया अपने आप ठीक हो जाएगी !
हमारे सोंच हमारी भावना और हमार स्वभाव एक परछाई की तरह काम करता है ! हम एक वस्तु खड़ी करते है और उस वस्तु की परछाई पड़ती है उस परछाई को हटाने के लिए बहूत कोशिश करते है लेकिन हटती ही नहीं अगर हम उस वस्तु को ही हाच दे तो परछाई अपने आप चली जाएगी उस तरसे हम अपने जिंदगिसे हमारे नेगेटिव थॉट हटाएंगे तो बिमारिंया अपने आप चली जाएंगी !