
हम जो खाना खाते है ओ पूरी तरह ऑर्गैनिक है क्या ! Is the food we eat completely organic?”
भारत देश मै Malnutrition यानि वह स्थिति है जब शरीर को आवश्यक पोषक तत्व (जैसे प्रोटीन, विटामिन, मिनरल, कैलोरी) सही मात्रा में नहीं मिलते लेकिन अब obesity यानि मोटापा एक चिंता विषय बन चुका है ! हमारा देश नूट्रिशन पर काम कर रहा है , हम भि नूट्रिशन को ध्यान मे रखकर खाना खाते है ! हमारे समाज मै , शहर मै , हमारे पड़ोस मै हम लोगो को देखते है दावाई के पॅकेट खाकर लोग थक चुके है ! अब ओ हेल्थी खाना खाना चाहते है , और हेल्थी रहना चाहते है ! जो भि खाना बाजार से लाते है अपने और अपने परिवार के हेल्थ के बारे मे जरूर सोचते है ! कोशिस ये करते है की कोही भि पॅकेट फूड या प्रोसेस्ड फूड ना खाए ! जो भि खाना खाए घर पर बनाके खाए नाकी बाहर का ! तभी भि हम स्वस्त क्यों नहीं ! क्योंकि पिछले कुछ सालों मै उसमे काफी बदलाव आ चुका है ! खेती करनेका तरीका बदल चुका है ! लोग अब पारंपरिक पद्धतिसे नहीं बल्कि आधुनिक पद्धतिसे खेती करते है ! मै गाव की बात करती हु अब घरों मे महिला चक्की नहीं चलना चाहती पुरुष मेहनत का काम नहीं करना चाहते ! जो सायिकाल पर थे ओ मोटरसायिकाल पर आ गए जो पैदल चल रहे थे ओ अब घर पर बैठ गए ! गाव मै जो खेती करने की जो पंरपरा थी ओ भि खतम हो चुकी है ! हम अपना छोड़के पराए पर जादा विश्वास करते है !
अब लोग जैविक / ऑर्गैनिक नहीं बल्कि केमिकल खेती करते है ! हर एक चीज बदल चुकी है ! अब पारंपरिक चीजों की जगा केमिकल और मशीन ने लियि है ! अब सब्जींया उगाने से पहेले यूरिया डाल के सब्जी को जल्दी-जल्दी बढाया जाता है ! फ़िर उसके आस-पास की घास को जलाने के लिए herbicides डालते है , उसके बाद उसपर प्रेसतेड़िस छेड़ता है ताकि कीड़े उनसे दूर रहे ! इस प्रोसेस से उगाई गई सब्जी मे एक अलग चमक होती है , जल्दी खराब नहीं होती ,दिखने मै एक समान होती है लेकिन पोषन थोड़ा काम होता है ! इसीलिए हमे आज सब्जियोंसे ना स्वाद आता है ना सेहद !
ऑर्गैनिक सब्जीया दिखने मे थोड़ी रूठी होती है ! एकसमान नहीं होती ,कोही चमक नहीं होती क्योंकि जैविक खेती मै सब्जींयों पर कोही केमिकल नहीं छिड़काया जाता केवल गोबर या जैविक खतों का इस्तमल करके और कीड़े भागने के लिए चूल्हे की राख और नीम ऑइल का ईस्टेमाल किया जाता है ! इसीलिए सब्जीया अपने दम पर उगती है और पुरा समय लेती है , पकाने और किसी भि घास जलाने की दवैयोंका ईस्टेमाल नहीं किया जाता इसके अलावा मौसमी और देसी फल खाना सबसे अच्छा माना जाता है, क्योंकि वे प्रकृति के अनुसार शरीर को पोषण देते हैं।
र्ऑर्गनी खेतिक का उद्देश ये होता है की हर एक उत्पादन शुद्ध और स्वस्थ हो अनाज और सब्जी मे कीड़ा दिखना आम बात है , ओ इस बात का सबूत है की ओ अर्गनीक है ! खतरा हमे कीड़ों से नहीं केमिकल से है ! कीड़ा तो साफ करके निकाल जा सकता है !
सब्जींया काटने पर खुशभू आयेगी बनने पर जल्दी पकेगा और खाने मे बेमिसाल ! इसको जब आप खाएंगे तब अपको समज मे आ जाएग ! आपका मन और आपकी सेहद दोनों अब अच्छे रहने लगे है ! छोटी-मोठी बीमारिया infection सभी को हम धीरे धीरे भूल जाएंगे और सोचेंगे पिछली बार हम बीमार काब पड़े थे !
ऑर्गनीक दाल चावल (grain pulses )
देसी चावल वे पारंपरिक धान की किस्में होती हैं जो भारत में पुराने समय से प्राकृतिक रूप से उगाई जाती रही हैं। इनका बीज किसान साल-दर-साल खुद संभालकर फिर से बो सकते हैं। इन्हें लोकल या पारंपरिक धान की किस्में भी कहा जाता है स्वाद और खुशबू अच्छी होती है जादा चमक नहीं होती ! लेकिन हमारे सेहड़ के लिए महत्वपूर्ण होती है !
दाल को घर पर जो पतथर की चक्की होती है उसपर पीस जाता है उसपर कोही पोलिश नहीं लगाया जाता उगाने मे ऑर्गैनिक बीजों का ईस्टेमाल किया जाता इसीलिए ओ थोड़ी साधारण दिखती है उसके दानों का साइज़ एक समान नहीं होता है और थोड़े छिलके भि होते है ! उसमे कीड़ों से बचाने के लिए उसमे लाल मिर्च लवंग या नीम की पत्तीया डाले जाते है लेकिन जल्दी पकती है ! और स्वाद और सेहड़ दोनों होती है !
ऑर्गैनिक सब्जींया फल (fruit vegetables)
ऑर्गैनिक सब्जींया जल्दी खराब होती है , एकसमान नहीं होती , जादा बड़ी नहीं होती स्वाद से भरी होती है ! कभी कभी सब्जींयों मे कीड़े होते है दाग या चट्टे होते है, जैसे अदरक गाँठी वाला होता है , गाजर छोटा होता है , करेल बहूत कड़वा , आलू छोटे-छोटे थोड़े डार्क , टमाटर और कुकूम्बर काटने पर पूरे घर मे इसकी खुशभू फैलती है यही उसकी ऑर्गनीक होने की पहचान होती है ! ऑर्गनीक सब्जियोक छिलका पतला हिट है !
ऑर्गैनिक फल जो होते है उन्हे उगाने के लिए जीवमृत और दश पर्णी अर्क का ईस्टेमाल किया जाता है ! जैसे पपाय ओ छोटा होता है ! सपरचब थोड़े दाग होते है , अंगूर छोटे साल पतली और बहूत मीठे , टरबूजा थोड़ी रेशे होती है
भारत में कई जंगली फल ऐसे होते हैं जो साल में सिर्फ एक बार मौसम के अनुसार उगते हैं। ये फल प्राकृतिक रूप से जंगलों में उगते हैं और बहुत पौष्टिक माने जाते हैं।
जामुन, बेर, इमली, महुआ, फल ,करोंदा, कैथ, बेल, आंवल,देसी आम , सीताफल और फानस ये फल कुदरत के हिसाब से उगते है ! हर फल मे सीजन के अनुसार गुणधर्म होते है जब गर्मी अनेवाली होती है तब थंडी तासीर वाले फल उगते है अपने आप , और थंडी थंडी के मॉसम मे गरम तासीर के फल उगते है !
देसी मिल्क (organic milk ) ओ गाय जगल मे चरने जाती है और जंगल का घास कहती है । देसी मिल्क ओ गाय या भैस से मिलता है जो दिन मे जंगल मे जाकर हरा चार खाती है और शाम को घर आकार धूध देती ओ गाय या भैस बिलकुल इंडियन देसी होती है और उसको कोही भि बहर का खुरख नहीं दिया जाता या कोही भि injection नहीं दिया जाता उनके साथ उनका बाछरा भि रहेट है !
देसी घी (organic ghee ) -देसी घी ट्रडिशनल तरिकेसे निकला जाता है देसी दूध को बिना मलाई निकाले बिना उबले उसको एक मिट्टी के बर्तन मे दही डालके जमाया जाता है जजमने के बाद उसे मिट्टीके बर्तन मे रख के जामुन की लकड़ी की मदत से चर्न किया जाता है उसके बाद उसे चूल्हे पर लोहे की कढ़ाई मे डालकर लकड़ी की आग पर धीरे -धीरे पकाया जाता है ! देसी घी बाजार के घी से बहूत महंगा होता है क्योंकि उसे निकालने मे 1 किलो घी को 30 लीटर देसी दूध लकगत है तब जाके असली देसी घी निकलता है इसीलिए देसी घी को एक मेडिसिन मन जाता है
ऑर्गैनिक शहद और गुड़ (jaggery Honey )
आज-कल शहद मे शुगर सीरफ का इस्तमल किया जाता है इसलिए अकाली और नकली शहद पहचाने नहीं आती इसलिए हम शहद सिद्ध फार्म सही लेना बेहतर होगा !
गुड को बनाने मे बहूत केमिकल का ईस्टेमाल किया जाता है इसलिए हमे गुड खाने पर कोही फाइदा नहीं होता ! ऑर्गैनिक गुड को बनाने मे कोही केमिकल का ईस्टेमाल नहीं किया जात असली केमिकल फ्री गुड खाने मे थोड़ा अजीब होता है !
ऑर्गनीक चिकन मटन (organic chicken mutton egg )
देसी मुर्गा या बकरी होता है उसे खुली हाव मे छोड़ जाता है उसे अनाज बीज घास खिलाया जाता(मुर्गी तो किचार मे से कीड़े चिटी भि निकाल कर खाती है ) है और उसको कोही भि हार्मोनस बढ़नेकी दावाई नहीं दियि जाती और उनके पिल्ले ही बड़े किए जाते है ! देसी मुर्गी या बकरि बाडा होने मै समय लगता है और उसका वजन जादा नहीं बढता ! देसी मुर्गे का अंडा बहूत छोटा होता है और जादा सफेद नहीं दिखता लेकिन बहूत हेल्थी होता है !
हम हर बार छुट्टिया मनाने बाहर गुमाने जाते है एक बार फार्म मे जाइए और देखिए फार्म मे किसान अनाज फल सब्जीं कैसे उगता है ? गाव मै तो बहूत फार्म होते लेकिन सिटी मे भि हर सिटी के पास कोही एक तो फार्म जरूर होता है , वह जाए वहा जाके देखे किसान अनाज कैसे उगता है कैनसे सीजन मै कॉनसी सब्जी उगती है किस तरसे से उगती है ! किसान का खेती करने का तरीका परंपरिक देसी है या संकरणित हाईब्रेड ! एक चीज है जो हमारे शरीर मै रोज डालते है लेकिन हमे उसमे इन्टरेस्ट ही नहीं !