नैटुरोपैथी क्या होती है ? what is naturopathy ?

naturopathy

नैटुरोपैथी  क्या है ? what is naturopathy

नैटुरोपैथी  एक ड्रगलेस थेरफी है!

नैटुरोपैथी एक ड्रगलेस थेरपी है ,जिसमे बिना मेडिसिन के शरीर  का इलाज किया जाता है ! आज हम देखते है जैसे -जैसे मॉडर्न टेक्कनॉलॉजी आगे बढ़ रही है , हमारी दुनिया उतनीही  अड्वान्स होती जा रही है ! मेडिसिन का वापर बढ़ता जा रहा है,पर ये सही बात नाही है, मेडिसिन बिमारीको दबा देती है, पूरी तरह से जड़ से नाही निकलती. लेकिन नैटुरोपैथी  बीमारिके जड़ तक जाके उसके कारण को समज कर उसका उपचार करता है!

नैटुरोपैथी  एक ऐसी प्याथी है ,जो कहती है आहार ही औषध है !  सही आहार ,सही टाईम ,सही मात्र मै, सही कॉम्बिनेशन के साथ लिया जाए तो आहार आपके लिए औषधि है ! 

नैटुरोपैथी  यही कहता है हमार जो शरीर होता जो की पाच तत्व (मिट्टी ,पानी  ,धूप ,हवा ,आकाश )से बना है ! इसके पास शरीर को ठीक करने की इतनी शक्ति होती है, जो हमारे शरीर को ठीक कर सकती है ! अब नेचर ने हमारी बॉडी का मेटाबॉलिज्म इतना अड्वान्स बनाया है की ,हम जब खाना खाते है , ओ खाना पेट मे जाता है  पेट मे से अंत जाता है  वहा  खाना पचाता है, अंत मे से पोषण तत्व शोषण करके  उसके बाद खून मे जाकर और पूरे शरीर मे सप्लाय होता है ! अब नेचर ने हमारी बॉडी का मेटापोलिसम  इतना अड्वान्स बनाया है, तो उसके पास उसको ठीक करने की भि शक्ति जरूर होगी !  पर हम इसको समजनेमेही भूल करते है ! नैटुरोपैथी  यही कहता हे की हमारा शरीर है इसके पास इतनी ताकत है की  जब हम बीमार पड़ते है तो हमारा शरीर ही उसको ठीक करता है, हम उसका लाभ जरूर उठाए!

   बहूत सारी पैथी होती है ! जैसे होम्योपैथी , एलोपैथी (आधुनिक चिकित्सा), आयुर्वेदा ,योग लेकिन हर एक पैथी   का अपना -आपण तरीका होता इसिलिया हर एक पैथी  का ट्रीट करने का तरिका आलग होता है ,हर किसी का शरीर अलग होता है ,हर किसी की पाचन शक्ति अलग होती है ! काढ़ा पीना, कच्चा खाना खाना, या सिर्फ कुच हार्भ औषधि लेना या योग करना  मतलाभ  नैटुरोपैथी  नहीं !

नैटुरोपैथी  के प्रमुख पाच तत्व (element )

नैटुरोपैथी  एक तपस्या है ! इसमे जो पाच तत्व है वह हमारे लिए पाच प्रकार के भोजन समान है ! जैसे हमारा शरीर भोजन के बिना नहीं रह सकता वैसे इन पाच तत्व की कमी से हमारी प्रकृति मे भिघाड़ आता है !

हमार शरीर (मिट्टी ,जल ,अग्नि ,वायू ,आकाश ) इन पाच तत्व से बना है ,और इन पाच तत्व का हमारे शरीर के सभी अंगों से संबंध होता है !

  1. आकाश  तत्व (Water element )

हमारे शरीर मे जितना भि खाली जगह है  जैसे मुह ,कान ,नाक ,पेट छाती  और कोशिकाओ के बीच खाली जगह!  !  उसको आकाश तत्व कहते है ! हमारे शरीर मै जीतने भि खाली हिस्से है उन्हे विध्यमान करना आकाश तत्व का काम है ! हम क्या करते है !

हमारी गलत दिनचर्या या गलत खान-पान की वज से उस खाली जगा को भर देते है, या उसको बंद कर देते है ! आकाश तत्व की कमी से हमारे शरीर मे मानसिक और शारीरिक प्रभाव पड़ता है , तनाव ,असंतोष ,अकेलापन ,वात दोष , सिरदर्द बढ़ सकता है ! उपवास या हल्का भोजन करने से आकाश तत्व सक्रिय होता है, जिससे शरीर से विषाक्त पदार्थ बाहर निकलते हैं और पाचन शक्ति सुधरती है! ध्यान मौन मुद्रा उपवास हल्का भोजन आदि अपना सकते है !

  सुबह की धूप और हवा घर में आने दें, खिड़कियां खोलें!

  घर में विंड चाइम्स (पवन घंटी) लगाएं!

  ध्यान (meditation) और शांत वातावरण में समय बिताएं!

  सूर्योदय के समय आकाश की ओर देखकर आभार व्यक्त करें!  

  • वायू तत्व (Air element )

हमारे शरीर मे जो श्वसन प्रक्रिया चलती है ओ वायू द्वारा चलती है ! जैसे सास लेना सास छोड़ना होता है ! हमारे शरीर मे सास लेने मे और छोड़ने मे दिक्कत वायू तत्व की कमी होने से होती है  ! ये तत्व अदृश है लेकिन हमारे शरीर के लिए बहूत आवश्यक है ! हमारे शरीर की हर प्रकार की गति वायू तत्व से होती है ! हमारे शरीर मे  फेफड़ो और हृदय को ठीक से काम करनेमे मदत करता है ! तत्व की कमी से शरीर मे भारीपन जोड़ों मे वायू अकड़न या दर्द ,पाचन सम्बधी समस्य आती है

प्राणायाम और गहरी श्वास ले

खुली हवा में टहलना

हल्का और सुपाच्य भोजन

नियमित दिनचर्या

  • अग्नि तत्व (Fir element )

हमारे शरीर मे जो अग्नि तत्व भूख और प्यास को नियंत्रित करता है ! भोजन पचानेक काम करता है ! भोजन मे से पोशाक तत्व निकाल के उसे ऊर्जा मे बदलता  है ! शरीर को उष्णता प्रदान करता है ! कोशिकां की निर्मिती करता है, उससे हमारे शरीर को प्रतिकारक शक्ति प्राप्त होती है ! बुद्धि की सक्षमता बढ़ती है , तर्कशक्ति और यदश बढ़ती है ! हमारी दृष्टि तेज रहती है !

अग्नि तत्व कमी से मंदी पाचन ,अपच ,कब्ज ,त्वचा का रंग फीका पड़ना ,चिड़चिड़ापन आदि समस्य उढ़भवती है ! और अग्नि की अधिकता से जलन महसूस होना , अत्यधिक पसीना,एसिडिटी ,पित्त विकार अत्यधिक पसीना बेचान होना आदि समस्य होती है !

एससे काम करने के लिए थंडा भोजन ,कड़वी सबज़्जीया  और शांत वातावरण चाहिए !

  संतुलित और ताजा भोजन

  सुबह की हल्की धूप

  नियमित दिनचर्या

  प्राणायाम और ध्यान

  • जल तत्व (Water element )

हमारे शरीर मै70% पानी  है ! औरपानी  हमारे शरीर का आधार है! पानी  हमारे शरीर के तापमानको नियंत्रित करता है ! हमारे शरीर मे तरलता और परिवहन लता है ! पानी  की  वजा से हमारे शरीर मे नमी   बनाई रहती है ! पानी  की माध्यम से शरीर मे पोशाक तत्व और ऑक्सीजन पहुंचता है !

   दिनभर में 7–8 गिलास या शरीर की जरूरत अनुसार पानी पिएँ
   नारियल पानी, नींबू पानी लें
   तरबूज, खीरा जैसे जलयुक्त फल खाएँ
   सुबह खाली पेट गुनगुना पानी
   धूप में जाने से पहले पानी जरूर पिएँ

  • पृथ्वी तत्व (Earth element )

  शरीर मे दांत, हड्डी ,मासपेशिया ,नाखून   आदि की निर्मिती करके उन्हे सहाय्य करता है ! हमारे शरीर मे स्तिरता और ताकत लता है ! पृथ्वी तत्व की कमी से  बहुत ज्यादा उपवास या कम भोजन पोषक तत्वों की कमी अधिक तनाव नींद की कमी अत्यधिक भाग-दौड़ 

  पौष्टिक और स्थिर भोजन – अनाज, दालें, जड़ वाली सब्जियाँ (जैसे शकरकंद, गाजर)

 नियमित दिनचर्या अपनाना

 मिट्टी चिकित्सा (मड थेरेपी)

  अ च्छि  नींद लेना

जमीन पर नंगे पाँव चलना ((Earthing)

नैचुरोपैथी  लंबे समय तक स्वास्थ्य सुधार में बहुत प्रभावी है!
नैचुरोपैथी शरीर को अंदर से मजबूत बनाकर लंबे समय तक स्वस्थ जीवन जीने में मदद करती है ! लेकिन आपातकाल या गंभीर बीमारी में इसे आधुनिक चिकित्सा के साथ मिलाकर अपनाना बेहतर होता है!

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